जब दुनिया में खोली आँखें मैंने..
देखा एक चेहरा मुस्कुराता हुआ...
कोई था ममता की बाँहों में थामे...
देता मुझे लाखों दुआ...
दुनिया की हर नज़र से बचाए..
वो मुझे दुलारते थकती नहीं...
मेरे जीवन के उज्जवल सपने..
वो सजाते कभी थकती नहीं..
उंगली पकड़ कर चलना सिखाया..
शब्दों का भी ज्ञान कराया...
नासमझी की हर दौर में..
उसने ही मुझे रास्ता दिखाया...
उसकी ममता की छाँव में होने लगी मैं सायानी..
तो बन गयी वो मेरी दोस्त , सुनी मेरी हर कहानी..
मेरी खुशियों में होती वो खुश..
दुआ करती मुझे मिले न कभी नाकामी...
आज मैं परिपक्व हुई, दुनियादारी की समझ हुई..
बढ़ने लगी एक सफल जीवन में,जीने की हक़दार हुई..
लेकिन उसकी नज़रों में ,आज भी हूँ मैं एक नन्ही परी..
जो उसकी उंगली थामे ,थी पहला कदम चली...
कोई और नहीं है वो ...
जिसने मुझे जीवन दान दिया..
वो है इश्वर का आशीर्वाद...
वो है "मेरी माँ"
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