आज सुनाती हूँ मैं अपनी ज़ुबानी..
एक तोता और मैना की कहानी..
तोता था समझदार और मैना नादान..
फिर भी हुई मोहब्बत..
दोनों थे उसके कदरदान..
मैना मान बैठी तोते को अपना..
सोचा ही नहीं की टूटेगा कभी ये सपना..
नादानी में सताया तोते को उसने..
दर्द तो पाया था साथ में खुदने..
बेरहम हुआ तोता और छोड़ चला उसको...
भूल गया जो सजाये थे सपने..
न देख सका वो मैना की तड़प..
छोड़ दी उसने उस मैना की सड़क..
लेकिन सच्चे प्रेम का कभी अंत नहीं होता..
आज भी मैना करती है हर डाली पे उसका इंतज़ार..
क्यूंकि मैना करती है आज भी उससे सच्चा प्यार..
एक तोता और मैना की कहानी..
तोता था समझदार और मैना नादान..
फिर भी हुई मोहब्बत..
दोनों थे उसके कदरदान..
मैना मान बैठी तोते को अपना..
सोचा ही नहीं की टूटेगा कभी ये सपना..
नादानी में सताया तोते को उसने..
दर्द तो पाया था साथ में खुदने..
बेरहम हुआ तोता और छोड़ चला उसको...
भूल गया जो सजाये थे सपने..
न देख सका वो मैना की तड़प..
छोड़ दी उसने उस मैना की सड़क..
लेकिन सच्चे प्रेम का कभी अंत नहीं होता..
आज भी मैना करती है हर डाली पे उसका इंतज़ार..
क्यूंकि मैना करती है आज भी उससे सच्चा प्यार..
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