Wednesday, 6 July 2011

‎!!न जाने क्यूँ!!

आज भी न जाने क्यूँ..
हवा उसको छूकर आती है...
मेरा दामन हिलाकर,उसकी याद दिलाती है..
और उसके होने का एहसास, हर पल मुझे कराती है..

दूर होकर भी न जाने क्यों करीब है वो..
फिर भी बिछड़ जाना उससे ,मेरा नसीब है क्यों..
दर्द के दायरे भी छोटे लगने लगे..
आखिर उसकी चाहत में इतनी तकलीफ है क्यों...

उसको बहुत पीछे छोड़ आइ हूँ मैं..
हर नाता उससे तोड़ आइ हूँ मैं..
लेकिन अरमान मेरे दामन से लिपटे हैं आज भी...
न जाने उसके लौट आने की उम्मीद लगायी है क्यूँ..

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